अनोखा मिलन 🌹 (02)

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सपना -- कैसी लग रही हूँ बाबूजी..

मैं -- (मेरी साँसे तेज़ थी..) बहुत अच्छी लग रही हो बहु.. लाल कलर की ब्रा पैंटी में बहुत गोरी लग रही हो, और तुम्हारी जांघें कितनी मोटी चिकनी और मांसल हैं बहु.. (ऐसा कहते हुवे मैंने आँख बंद कर अपने लंड का स्किन पूरा खोल 3-4 बार जोर से स्ट्रोक दिया.)।

सपना -- (हँसते हुवे.. -- सच्ची बाबूजी.. मुझे भी इसकी कलर बहुत पसंद है.. आपको ठण्ड लग रही है क्या? आपने ब्लैंकेट क्यों ले लिया?

मैं -- हाँ बहु थोड़ी ठण्ड लग रही थी.. (मैं बहु की सेक्सी स्ट्रक्चर देख तेज़ी से मास्टरबेट करने लगा..)।

सपना -- क्या हुवा बाबू जी? आपके हाथों को -- इतना क्यों शेक कर रहे हैं?

मैं -- कुछ नहीं बहु तुम्हारे कमरे में मच्छर ज्यादा है पैर पे कोई मच्छर ने काट लिया शायद.. (मैं खुजलाने के बहाने और तेज़ी से लंड हिलाने लगा और बस थोड़ी देर में ब्लैंकेट के अंदर मेरे लंड से गाढ़ा पानी निकल आया.. )।

सपना -- हाँ बाबूजी मच्छर तो ज्यादा है यहाँ.. मैं गुड नाईट लगा देती हूँ..

(बहु मेरे सामने ब्रा पैंटी में अपनी गांड मटकाते हुवे स्विच के तरफ गई और गुड नाईट लगाने लगी..)। मैंने मौका देख तुरंत अपना लंड अंडरवियर के अंदर वापस डाल लिया. सपना बेड के ऊपर आ गई और घुटने पे मेरे सामने बैठ अपनी ब्रा को छूते हुवे बोली..

सपना -- बाबूजी.. इस ब्रा की क्वालिटी कितनी अच्छी है ना?

मैं -- (मैं बहु के पास आया और अपने हाथ बहु के कंधे के पास ब्रा को छूते हुवे..बोला) हाँ बहु ये तो बहुत अच्छा है. मैं धीरे से अपना हाथ नीचे ले आया और साइड से बहु की ब्रा के अंदर हाथ डालते हुवे ब्रा के कपडे को छूने लगा... मेरी उंगलियां बहु के नंगे बूब्स को महसूस कर रही थी..

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