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9 stories
सप्त क्रांति विचार यात्र�ा ni webmanthan
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पूर्वोत्तर की यात्रा -यात्रा डायरी  ni webmanthan
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डॉ0 लोहिया के जन्मषताब्दी वर्ष में समाजवादियो ने हजारो कार्यक्रम आयोजित किये। डॉ0 लोहिया के विचारो के प्रचार प्रसार को लेकर हमने सप्तक्रांति विचार यात्रा देष के 21 राज्यो में 9 अगस्त 2009 को मुम्बई के अगस्तक्रांति मैदान से शुरू की। 20,000 कि.मी. की 21 राज्यो में यात्रा करते हुए 12 अक्टूम्बर को 300 कार्यक्रम आयोजित कर हम दिल्ली पहुंचे। लेकिन हमारी यात्रा अधुरी थी। ...हमने 30 मार्च 2010 से पूर्वोत्तर की यात्रा शुरू की
 कितनी तैयारी है ni webmanthan
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लोहिया के आरमानों को पूरा करने की कितनी तैयारी है, समाजवादियों की ?
पुनर्जन्म  ni webmanthan
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पुनर्जन्म को लेकर मेरे मन मे भी शुरू से जिज्ञासा रही की चर्वाक के उस सिद्धांत को मानू की जीवन के खत्म होते ही सब कुछ समाप्त हो जाता है. कुछ नही बचता. मिट्टी का शरीर मिट्टी मे मिल जाता है. चेतना शरीर के साथ ही समाप्त हो जाती है. या कृष्ण की बात को की जीवात्मा अजर अमर है.
सफर ni webmanthan
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जरा एक मिनिट ठहरीये ... इसे लिखते समय मेने इश्वर और स्वर्ग के बारे मे बहुत कुछ कहा है जो पूर्व धारणाओं पर आधारित बस एक कल्पना मात्र है. मै साफ कर देना चाहता हू की यह उपन्यास स्वर्ग और इश्वर के बारे मे कोइ आकलन नही है. यह सच है की मेने इश्वर से बहुत सारे सवाल जीवन और मृत्यु और उसके बाद के बारे मे किये है पर उस तरफ से अभी तक मुझे इस बारे मे कोइ सटीक जबाब नही मिला है जिससे मे इस बारे मे पक्के तोर पर कुछ कह सकू. मै किसी के विशवास पर चोट नही कर रहा हू की वो कंहा से आया है और मौत के बाद उसे कंहा जाना है. ना ही मै कुछ स्थापित नहीं करना चाहता...यह तो बस मौत के बाद की असीम संभवनाओं में से एक की काल्पना है, जिसने जीवन और मौत के पहलुओं को बस छुआ भर है. उम्मीद है इसे पढते समय आप अपनी कल्पनाओं के पंख को पूरी तरह खोलते हुये मेरा साथ एक नये सफर पर चलेगे. भला को इंटरनेट का की इतनी सारी चेतानाओं के साथ इ
Manthan-2 Why don't we just live life? ni webmanthan
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Most suffered population is our tribes. every single minute they spend with there loves one and in total harmony with surrounding keeping their desires and need to the minimum .... Now modern society and city life has polluted their river, huge devastation of their forest. ...they are kicked out of their natural habitat. it is all done by so called smart and intelligent civilization.
ना जाने क्यों  ni webmanthan
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ना जाने क्यों ...समय समय पर उठने वाले वैचारिक बबंडर का ताना-बाना है जिसे कुछ लोग कविता कह देते है.
Alamana - The Secret of Indian Ocean#YourStoryIndia ni BTalekar
BTalekar
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*Winner Of #YourStoryIndia.2016 *Published Novel - 2017 ये कहानी भारतीय आलौकिक कहानियों और पौराणिक कथाओं से प्रेरित है । हमारी हज़ारों साल पुरानी और सबसे रोमाँचक कथाओं को इस कहानी के ज़रिये मैंने इसे एक नया रुप देने की कोशिश की है । हमारी ही तरह इक्कीसवीं सदी में रहने वाला एक मामूली लड़का अपनी ही नियति से अंजान है । पूरी धरती पर बस वही एक है, जो इस पृथ्वी को बचा सकता था । लेकिन उसकी नियति उसे अपने पास खीच ही लाई । इसी वैज्ञानिक चमत्कार और उपकरणों से भरी दुनिया से दूर समुद्र की गहराई में बसने वाली एक अनोखी लड़की जिसका जीवन ही था, जो उसे अपने लक्ष्य से दूर कर रहा था । उसका काम था अपने रक्षक को उसकी नियति तक पहुँचाना । लेकिन वो इस काम को चाह कर भी पूरा नहीं कर पा रही थी । क्या ये दोनों अपने जीवन के रहस्यों को जान पाएँगें ? क्या ये अपने इस लक्ष्य को पूरा कर पाएँगें या फ़िर इस पृथिवी का अंत क़रीब है ?! ✔:Keep voting.
आनन्दमय जीवन ni raimail82
raimail82
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