Ye kahani hai ek shadi shuda ladki ki jo apne pati or unki maa ko bakhubi sambhalti hai. Par uska husband aakash use nhi chahata hai. Fir ek din shalni ke room se aakash ko kuch lateral milte hai jisse use pata chalta hai ki vo use kitna chahati hai. Par tab tak der ho chuki hoti hai. Jise padh kar vo bahut rota hai or pachhtata bhi hai. Ki kash vo use samjha hota.
अनकहे लफ्ज़ जो एहसासों से भरें है।
कुछ जुड़े, कुछ टूटे बिखरे पड़े हैं।
कुछ अपने है, कुछ तुम्हारे वो अल्फाज़ जो आंशुओ में भरे हैं।
ना किसी ने सुने न किसी ने कहे हैं।
अनकहे से लफ्ज़,,,,,,,,,,,,
ये कहानी है उत्तराखंड में रहने वाली एक लड़की की जिसका बचपन का सपना था। विदेश में पढ़ने का क्योंकि उसके गांव में विदेश में पढ़ने वाली लड़की को बहुत ही होशियार और किस्मत वाली लड़की माना जाता हैं। और उसका यही सपना पूरा करने के लिए उसके पिता उसकी शादी अमेरिका में कर देते ह ैं।
वो विदेश में पढ़ना तो चहती थी पर शादी करके नहीं। मैं एक छोटे से गांव की लड़की जिसका सपना विदेश में जाकर पढ़ने का है, यह सपना तो पूरा होने को है लेकिन इस शर्त पर की मुझे शादी करनी पड़ेगी किसी ऐसे लड़के से जिसको मैंने कभी नहीं देखा और न ही उसके बारे में ज्यादा जानती हूं।