naina_meenaa की पठन सूची
3 قصص
Ghar Ghar Ki Kahani  بقلم AdhuriChaahat
AdhuriChaahat
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    فصول 5
Hello Dosto .. Main Hoon Rohan . Main Aapko Apni Ghar ki kahani Bata ne Jaa Raha hoon . Jo Koi Kisi Ko Nehi Batata . Sab Se Pehle Main Apne Bare Mein Bata Deta Hoon . Mera Pura Naam Hain , Rohan Gupta , Main Dekhi Ka Rehne Wala Hoon . Meri Height 6.3 Feet Hai . Dikhne Main Thoda- Bahut Apni Mummy Pe Gaya Hoon Aur Mere Parivar Main , Meri Mummy , Papa Aur Ek Hee Badi Behen Hai . Jo Mujhe Meri Mummy Se Bhi Zyada Pyaar Karti Hai Aur Mujhse Kaafi Ladai Bhi Karti Rehti Hai . Agar Main Apne Mummy-Papa Ke Kaam Ki Baat Karun , To Woh Dono Hee Kaphi Bade Doctor Hain . Meri Badi Behen Bhi Unki Tarah Doctor Banna Chahti Hai , Aur Isiliye Mujhse Bhi Doctor Bann Ne Ki Ummeed Rakhte Hai . Yah Kahun Ki Roz Kaha Jaata Hai .. Mummy - Dr Manpreet Gupta , Papa - Dr Praveen Gupta , Badi Behen - Sandhya Gupta , Let's Begin The Story - ( Only 18+ ) Adult-Language ,
Jism بقلم kayra_kashyap
kayra_kashyap
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    فصول 8
ये दास्तां है एक दीवाने की जिसका नाम था ... दक्ष स्कसेना, कच्ची उमरा की 16 साल मैं ही जब लोग खेलकुद में ही उलझे रह जाते थे .... उस उमर में दक्ष ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की एक बड़ा मुकाम पाया था !! जिस मुकाम को पाने के लोग अक्सर सपने देखा करते थे, "लोग बिजनेस वर्ल्ड के बादशाह नाम से उसे जानते थे" दक्ष को कभी दूसरो से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वह अक्सर खुद में ही उलझा रहता था , ... क्या कामयाबी ने उसे एक ruthless जिद्दी गुस्से वाला इंसान बना दिया था इसकी वजह कहीं ना कहीं उसकी माँ पापा भी थे, जिनका होना ना होने के बराबर ही था दक्ष के life में ... दक्ष को ना सुन ने की बिल्कुल आदत नहीं थी , एक रात उसकी मुलाकात क्लब में एक लड़के से हुई जिसकी बातों ने उसे दीवाना बना दिया था वह चाह कर भी उसे और उसकी बातों को याद करने से खुद को रोक नहीं पा रहा ... इस बात का जवाब दक्ष के पास भी नहीं था आख़िर क्यों वह खुद से 4 साल
एक शैतान का जन्म - The Awakening....! بقلم vivekamailme
vivekamailme
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    فصول 116
"मोहन की दुनिया दो हिस्सों में बँटी थी: सुबह की मदहोश कर देने वाली शांति, जहाँ वह नीलिमा और कालिंदी का मासूम बच्चा था; और रात का तूफ़ान, जहाँ वह एक अजेय शैतान था जिस पर न गोलियों का असर था, न ही ज़हर का। प्रेतयोनि में जन्म के श्राप से उपजा यह दर्द मोहन को विरासत में मिला था। उसके अपने परिवार ने ही उसे मारने की कोशिश की, सड़कों पर छोड़ा। मगर शैलजा और रतन जैसे दयालु लोगों ने उसे एक नया नाम, और एक नया प्यार दिया। लेकिन नियति ने फिर क्रूर मोड़ लिया। जब उसे माँ जैसा प्यार देने वाली भाभी को उसकी आँखों के सामने बेरहमी से मारा गया, तब मोहन के अंदर छिपा रौद्र रूप जाग उठा। अब सवाल यह नहीं है कि शैतान कौन है, बल्कि क्या यह अजेय शक्ति बदला लेने के बाद भी शांत रह पाएगी? या क्या मोहन का क्रोध सिर्फ दुनिया को ही नहीं, बल्कि उसके अंदर बची इंसानियत को भी निगल जाएगा?"