sia_mahajan
साहिब, बीबी और ग़ुलाम
कुछ रिश्ते मोहब्बत से नहीं, मजबूरियों से शुरू होते हैं।
और कुछ मोहब्बतें... इंसान को तब मिलती हैं, जब उन्हें महसूस करना सबसे मुश्किल होता है।
राम - इस घर का साहिब।
दौलत, रुतबा और एक ऐसा नाम जिसे हर कोई सम्मान से लेता है।
लेकिन उस नाम के पीछे एक अधूरा सवाल है।
उसके पिता की मौत।
एक दिन वह अपने ही अध्ययन-कक्ष में मृत पाए गए।
न कोई गवाह था, न कोई जवाब।
वक्त बीत गया, मगर उस मौत का रहस्य वहीं रह गया।
फिर राम की ज़िंदगी में आई सिया।
बीबी।
लेकिन उनकी शादी मोहब्बत की कहानी नहीं थी।
वह एक कॉन्ट्रैक्ट था-कुछ शर्तों पर किया गया एक समझौता, जिसमें दोनों को पति-पत्नी बनकर रहना था, मगर एक-दूसरे से मोहब्बत करने की कोई शर्त नहीं थी।
सिया ने सोचा था कि यह रिश्ता बस काग़ज़ों तक रहेगा।
उसे क्या पता था कि कुछ रिश्ते काग़ज़ पर शुरू होकर दिल तक पहुँच जाते हैं।
और फिर था सु