विष्णु
3 storie
Bachpan Ka Formula di yogisunilsharma
yogisunilsharma
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यह एक ऐसी कहानी है जो आपको आपके बचपन की हसीन यादों और शरारतों का स्मरण करायेगी। इस कहानी का मुख्य पात्र विशाल नाम का एक छात्र है। जो बचपन से ही अपने कार्यों को करने के लिए नई नई तरकीबें निकालता रहता है। ये कहानी भी उन्हीं तरकीबों में से एक का एक अनूठा उदाहरण है।
अक़्स  di Jheel-poet
Jheel-poet
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winner of "Popular Choice Awards India 2019". in ** ( Poetry: Hindi )** "अक़्स" "REFLECTION" चला जाता हूँ जहाँ जहाँ तेरा अक़्स दिखाई देता है, छुपा लूँ जमाने से मैं कितना भी जख़्म दिखाई देता है! हम अपने दोस्तों को मिलनें चलें जाये क्यूँ बताओं तो, चुप ही होते हैं पर होठोंपे उनकी बज़्म दिखाई देता है! आईना है जैसा बना दिया है हमनें अपना घर लेकिन, जब भी देखूँ यह सूरत आँखों में अश्क़ दिखाई देता है! रात ख़ामोश बेज़ुबान हैं और सितारें चिराग़ो से रोश़न, ख़ुशबूसे महकता है बिस्तर सामने हश्र दिखाई देता है! यह जिंदगी ए मोहब्बत तो ख़ुदा की अमानत है मगर, यह जमाना इश्क़ वालोंसे बहोत सख़्त दिखाई देता है!
आज़ादी di DrLalitSinghR
DrLalitSinghR
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रात के घुप्‍प काले अंधेरे में बंद खिड़की की दरारों से बर्फीली ओस कमरे में आहिस्‍ता-आहिस्‍ता दाखिल हो रही थी और फायर प्‍लेस की गर्माहट उस पर एक गुनगुनी परत बनकर बिछ गयी थी। सबकी आँखों से नींद कोसों दूर थी । तुफैल ने कंबल ओढ़ ली और सर से पांव तक अपने शरीर को ढक लिया । फायर प्‍लेस की सुनहरी गर्मी बूढ़े जुम्‍मन मियाँ और आफरीन जिन्‍होंने मोटी ऊन का लिबादा पहन रखा था, के चेहरे की झुर्रियों को सेंक रही थी । फौज़ की गाड़ियों की आवाजें खिड़कियों के सुराखों से छनकर आ रही थीं जो घर में पसरे सन्‍नाटे को चीर रही थीं । कभी-कभी, बीच-बीच में नारों की आवाज नेपथ्य में गूंज रही थी, आजादी.......आजादी...........आजादी..... लेकर रहेंगे हम ...... आजादी ।