SriAurobindoMaa
'मेरी कहानी तेरी भी कहानी है दिव्य । इस कहानी का अध्याय सृष्टि रचना के साथ ही शुरू हो गया था। तब से कितने जन्मों का लेखा धरती की पाटी पर लिखा जा चुका है, इसे कोई नहीं बता सकता। प्रत्येक जन्म में मैंने अपने साथ आई आत्माओं को तराशा है। पृथ्वी में जहाँ-तहाँ बिखरी इन आत्माओं ने प्रत्येक जन्म में सृजन से सृष्टि के विकास को आगे बढ़ाया है। उनका यही कार्य धरती की पूँजी है। इसी की बदौलत हम आज इसे दिव्यता के प्रकाश में रूपान्तरित कर पाने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। विकास का यह पथ कोई सुखद यात्रा नहीं, दिव्य, यह बलिदानों की अंतहीन गाथा है। हमें बार-बार कुचला गया है, निगला गया है, फाँसी पर लटकाया गया है, रुलाया और हमारे जिस्मों को गिद्ध और कौवों से जीते जी कुतराया गया है। अमरता का पथ मृत्यु के पेट से होकर जाता है।'.....