MeReMaHaDeV
ये बात हर उस लड़की कि हैं जो दुनिया में आ चुकी हैं या आने वाली है। ये तकलीफ हर लड़की को सहन करनी पड़ती हैं । चाहे वो कितने ही अमीर पिता कि बेटी हो , चाहे कितनी ही सौंदर्या पूर्ण हो।
प्रकृति ने ये तकलीफ हर लड़की के नसीब मे लिखी है। और इसके बिना हर लड़की अधूरी है।
उसकी सुन्दरता अधूरी है। पर ये दर्द पराया नहीं है , ये हमारा अपना ही हैं पर सवाल ये है कि जब ये दर्द अपना ही है तो दर्द क्यों देता हैं । अपने तो प्यार करने के लिए होते हैं दर्द तो नहीं देते। हमारी आत्मा को मरोड़ते तो नहीं। .......
और ये दर्द सिर्फ हम ही क्यों सहे? आखिर कसूर क्या है हमारा ? क्या हमारा यही कसूर है कि हम लड़कियां हैं।.....
पर ये हमारा कसूर नहीं हमारा सौभाग्य है , हमारा स्वाभिमान है।
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