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लगभग २००० वर्ष पहले गुप्त साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले दो राज्य रतनपुर और अंबिकापुर के मध्य जन्मी एक अमर प्रेम की कहानी | रतनपुर के युवराज वीरराज और अंबिकापुर के राजा के पाँचवी रानी से हुई राजकुमारी विष्णुप्रिया को एक दूसरे से प्रेम हो गया |
राजनीति और स्वार्थों के कुचक्र के कारण यह प्रेम अधूरा रह गया | विष्णुप्रिया ने अपने प्राण त्याग दिए और वीरराज ने सब कुछ छोड़कर वैराग्य ले लिया | एक प्रेम के लिए संसार के समक्ष निर्बल होने के कारण शरीर त्याग कर चली गयी और एक जन्म मृत्यु के रहस्य को जानने के लिए और प्रकृति पर विजय पाने के लिए अध्यात्म की राह पर चल पड़ा |
कोई ईश्वर से प्रेम करता है तो कोई प्रेम को ही ईश्वर समझता है | यह कहानी है प्रेम से संसार के चक्र पर विजय पाने की |