Ankush125
कल फिर से एक सवेरा होगा पर उसके लिए नहीं होगा,
सपना था अपनी पहचान बनाने का पर किसे पता वो भी एक सपना ही होगा I।
जहां उम्र थी मांग में भरने की सिंदूर की,
वहीं जिस्म पर थी धाराएं खून की I
सीखा था स्कूल में कि हम सब भाई-बहन हैं पर सिखा किसने था
ऐसा ही तो हर भाई के कलाईयों पर रखी होनी थी,
पर ये दुष्कर्म भी भाई के उन्हीं कलाईयों से हुई थी I
देश तो आजाद है पर लड़कियां आजाद नहीं,
जो बीज बोया था मां-बाप ने, वो बीज अब रहा नहीं I
देश के सेवक भी इस हद तक गिरेंगे ये अनुमान नहीं था,
पर इस हाल तक पहुंचाया भी देश के एक सेवक ने ही था I
लड़कियों को रात में जाने के लिए इस देश में पाबंदी क्यों,
उनके साथ हो रहे जुर्म सबसे ज्यादा इस देश में ही क्यों I
रोज़ सुबह अपने जिस्म को साफ करते हैं,
पर जरूरी है अपनी सोच को साफ करने की I
जो नियम हैं कानून में इस देश में ,
समय है इनको बदलने की I
आजादी तो मनाते हैं दे