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यह कहानी है खनकस्थली की, एक ऐसी भूली-बिसरी और श्रापित भूमि की, जहाँ समय भी ठहर गया है। जब एक माँ, मेघना, अपनी बेटी माया के साथ अपने अतीत के अनसुलझे रहस्यों की तलाश में यहाँ पहुँचती है, तो उनका स्वागत एक अस्वाभाविक तूफान से होता है। यह तूफान उन्हें उस भूमि की अमर और श्रापित रक्षक, वृक्षावटी तक ले जाता है।
वृक्षावटी की आँखों में दशकों का अकेलापन और एक दर्दनाक अतीत कैद है-एक ऐसी कहानी जिसमें दोस्ती, धोखा, और एक ऐसा दिव्य श्राप है जिसने खनकस्थली को हमेशा के लिए वीरान कर दिया था। जल्द ही यह राज़ खुलता है कि माया, जिसके गले में उसकी दादी का दिया हुआ एक रहस्यमयी पत्थर है, ही उस श्राप को तोड़ने की एकमात्र कुंजी है, क्योंकि उसकी रगों में खनकस्थली के शाही रक्षकों का खून दौड़ता है।
माया अपनी नियति को स्वीकार करती है और वृक्षावटी को मुक्ति दिलाने के लिए एक प्राचीन अनुष्ठान करती ह