ShridharRajSingh
गुमनामी सी जिंदगी है,
गुमनाम हू मैं,
रोशनी की तलाश में,
अंधेरो में भटका हूँ मैं,
ना हि रोशनी मिली,
ना मिली इज़्ज़त,
फिर ना जाने किसकी तलाश गुम हो गया हु मैं,
जिंदगी से मोहब्बत ना रही,
कामयाबी की आदत ना रही,
ना जाने किसकी तलाश हैं,
गुम सा गया हूँ मैं।।