"तुम बिन, ये घर घर नहीं रहता"
1 část Rozepsáno यह तस्वीर किसी एक पल की नहीं,
एक पूरी ज़िंदगी की है।
एक माँ-
जो खुद घुटकर भी
अपनी बेटी को खुली साँस देना चाहती है।
एक बेटी-
जो माँ के सीने में सिर रखकर
अपना सारा डर, सारा दर्द
चुपचाप बहा देना चाहती है।
इस तस्वीर में
कोई चीख़ नहीं है,
कोई शिकायत नहीं है-
बस वो प्यार है
जो हालातों से लड़ते-लड़ते
खामोश हो गया है।
यह कहानी
माँ-बेटी के उस रिश्ते की है
जहाँ दोनों एक-दूसरे के लिए
मज़बूत बनती हैं,
ताकि घर बिखर न जाए।
क्योंकि
कुछ घर शोर से नहीं,
चुप्पी से टूटते हैं।
और कुछ माँएँ
खुद को खोकर भी
अपनी बेटियों को बचा लेती हैं।