Story cover for Default Title - Write Your Own by kggupta33
Default Title - Write Your Own
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Ongoing, First published Jul 18, 2018
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~"अष्टावक्र ऋषि"~ by ColourfulPen2009
1 part Ongoing
ऋषि अष्टावक्र का शरीर कई जगह से टेढ़ा-मेढ़ा था, इसलिए वह सुन्दर नहीं दिखते थे। एक दिन जब ऋषि अष्टावक्र राजा जनक की सभा में पहुँचे तो उन्हें देखते ही सभा के सभी सदस्य हँस पड़े। ऋषि अष्टावक्र सभा के सदस्यों को हँसता देखकर वापिस लौटने लगे। यह देखकर राजा जनक ने ऋषि अष्टावक्र से पूछा- ''भगवन ! आप वापिस क्यों जा रहे हैं ?'' ऋषि अष्टावक्र ने उत्तर दिया- ''राजन ! मैं मूर्खों की सभा में नहीं बैठता।'' ऋषि अष्टावक्र की बात सुनकर सभा के सदस्य नाराज हो गए और उनमें से एक सदस्य ने क्रोध में बोल ही दिया- ''हम मूर्ख क्यों हुए ? आपका शरीर ही ऐसा है तो हम क्या करें ?'' ऋषि अष्टावक्र ने उत्तर दिया- ''तुम लोगों को यह नहीं मालूम कि तुम क्या कर रहे हो ! अरे, तुम मुझ पर नहीं, सर्वशक्तिमान ईश्वर पर हँस रहे हो। मनुष्य का शरीर तो हांडी की तरह है, जिसे ईश्वर रुपी कुम्हार ने बनाया है। हांडी की हँसी उड़ाना क्या
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जीवन

8 parts Complete

ये किताब 9 पन्नो की है। इसमे जीवन के रहस्य को समझने की कोशिश की जाती है। आशा कृति हू के आपको ये पसंद आएगी।