मिन-जूनएक रात की बात है... एक रात की बात है। पाँच दोस्त एडवेंचर के लिए जंगल घूमने गए थे। घूमते-घूमते उन्हें घर लौटने में बहुत देर हो गई और रात हो गई। उन्होंने फैसला किया कि आज की रात जंगल में ही बिताई जाए। रहने के लिए सुरक्षित जगह खोजते-खोजते उनकी नज़र एक पुरानी, सुनसान हवेली पर पड़ी। हवेली को देखकर एक दोस्त बोला, "चलो, आज की रात यहीं गुज़ार लेते हैं।" उन्होंने अपनी कार हवेली के बाहर खड़ी की और धीरे-धीरे अंदर जाने लगे। तभी उनमें से एक दोस्त घबराकर बोला, "मुझे यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा। हमें यहाँ से चले जाना चाहिए।" बाकी दोस्त हँसते हुए बोले, "अरे, यहाँ कुछ नहीं है। तुम बेकार में डर रहे हो। चलो अंदर।" वे सभी हवेली के अंदर बढ़ने लगे। जैसे-जैसे वे अंदर जा रहे थे, हवेली का माहौल और भी डरावना होता जा रहा था। चारों ओर धूल जमी हुई थी, दीवारों पर मकड़ी के जाले लटक रहे थे और टूटी हुई खिड़क
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