वफ़ा करने की सज़ा
यह एक ऐसे दिल की आवाज़ है जो वफ़ाई निभाते-निभाते तन्हाई का आदी हो गया है। सामने वाला पहले ज़ख्म देता है, फिर उसी दर्द को कुरेदता है-और इसे इश्क की अजीब सच्चाई बताया गया है।
कविता में तुम यह मानती हो कि तुम्हारी नाराज़गी उस इंसान से कम, खुद की नादानियों से ज़्यादा है। तुम वफ़ाई को सिर्फ "किसी और से बात न करना" नहीं मानती, बल्कि यह मानती हो कि वफ़ाई का असली मतलब है-दिल में जो खास जगह किसी एक के लिए है, वो किसी और को कभी न मिले।
आख़िर में, यह दिखता है कि तुम अपने उसूलों पर अडिग हो-चाहे दुनिया से लड़ना पड़े, चाहे खुद से रूठना पड़े, लेकिन उस एक इंसान का इंतज़ार छोड़ने को तैयार नहीं हो।
एक लाइन में:
यह कविता वफ़ाई, तन्हाई और अपने ही दिल से लड़ते हुए सच्चे इंतज़ार की कहानी है।