A short story - "क्या माँ का प्यार हमेशा निस्वार्थ होता है? एक बेटी की अनकही दास्तां, जो तुम्हें खुद के रिश्तों के आईने में अपना चेहरा देखने पर मजबूर कर देगी। जब घर का सबसे सुरक्षित कोना ही तुम्हारा सबसे बड़ा नर्क बन जाए, तब त ुम क्या करोगी?। सगी माँ के आंचल में पली वो नफरत जो कभी बाहर नहीं आ सकी। क्या बड़ा हो जाने पर माँ-बेटी का रिश्ता सिर्फ एक समझौता बन जाता है? यह कहानी तुम्हारी है, मेरी है, और हर उस लड़की की है जो आज भी अपनी माँ की नज़र में अपनी जगह तलाश रही है।"
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