हमने कभी साथ बनारस आने का सपना देखा था... पर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। सालों बाद, वो अकेला वहाँ पहुँचता है- और गंगा आरती के बीच उसे फिर से देखता है। क्या वो सच थी... या सिर्फ एक याद? कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं- बस अधूरी रह जाती हैं।
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