1 part Ongoing मेरी दो किताबें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं -"भय की परछाइयाँ (हिंदी और अंग्रेज़ी में),
इन दोनों किताबों में मैंने अपनी ज़िन्दगी की वोसच्ची घटनाएँ लिखीं जो वाक़ई मेरे साथ घटीं।
रौंगटे खड़े कर देने वाली इन कहानियों को जबपाठकों ने पढ़ा,
तो इतने शानदार रिव्यू और 5-स्टार रेटिंग्स आए किमैं खुद चौंक गया।
मैंने तो बस अपनी सच्चाई लिख दी,और आज वो दुनिया भर में पढ़ी जा रही है।
इतना प्यार मिला कि मैं सोच में पड़ गया-क्या संच में, सिर्फ़ सच लिखने से भी किताबें लोगोंके दिलों में उतर सकती हैं?
मुझे हज़ारों ईमेल आने लगे-"सर, एक किताब और लिखिए."
तो मैंने सोचा, चलो एक और...
एक और सच्वी कहानी... ज़िन्दगी की किताब से