"
बारिश की बूँदें शहर की सड़क पर संगीत सा बज रही थीं। दीपक अपने जैकेट की हड्डी पकड़कर कॉफी शॉप की खिड़की के पास खड़ा था। वह रोज़ सुबह की चाय के लिए यही आता था, लेकिन आज कुछ अलग महसूस हो रहा था।
"आज मौसम भी अजीब है," उसने खुद से कहा, और उसी समय उसने देखा-a लड़की, भीगी हुई, उसके सामने खड़ी थी। उसका चेहरा आधा छिपा हुआ था उसकी हूडी में, और आँखों में कुछ अनकहा दर्द था।
दीपक ने झिझकते हुए कहा, "आप ठीक हैं? कहीं मदद चाहिए?"
लड़की ने धीरे से सिर हिलाया, लेकिन जवाब में कोई शब्द नहीं निकला। उसकी आँखों में एक रहस्य था-ऐसा रहस्य जो उसे खींच रहा था। दीपक ने उसे अंदर आने के लिए कहा।
कॉफी की गर्मी और बारिश की ठंडी हवा के बीच उनकी नज़रों की टकराहट हुई। लड़की ने धीरे से कहा, "मेरा नाम... मीरा है। मैं... बस यहाँ ठहर गई।" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उदासी थी।
दीपक ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, मीरा। यहाँ बैठि
Todos los derechos reservados