Story cover for Jokes by moiz-razee
Jokes
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प्यार् से गुमराह by Sona4416
1 part Ongoing
मेरी माँ के मुजपे बहोत उपकार हे! लेकिन मुझे मेरा गावं का जो भारत के नकशे मे भी नही हे! मेरे पापा ,माँ ,मेरे परिवार का पता लगान चाहता था! मेने हार नही मानी! छह महिने के पहिले ही मे गावं मे आया था! आते ही मुझे सब पता चला! मेरी माँ मेरे प्यार मे मर गई,सुनकर मुझे नही लगा की मे कभी आपको माफ नही करुंगा! छह महिने से मे आपकी हालत देख् रहा था! अभि मुझे लगा आपकी पापो कि शिक्षा बस हो गई! मुझे मेरे बाप जे उपर तरस आ गया! आप आपकी आखरी सास गिन रहे थे! तबी सोचा, अब मुझे आपके सामने जा ना होगा! पापा ललाच बुरी बरा होती हे! इसी लालच ने तुम्हे तुम्हरा पाहिला प्यार गुमराह् कर दिया! मेने मेरी माँ गुमराह कर दी! बाप ने अपनी आखरी सास ले ली! जस बेठे के उपर इतना प्यार था!वो सामने होने के बावजुद उसका सुख उपभोग ने लिये बाप नही रहा! उसने सबका प्यार गुमराह कर दिया!
a dark stoy_story of a unknown girl by Anayakavayu
4 parts Ongoing
"Shuruat" Neo tao Shahar roj ki Tarah shant or bache subhe subhe vahi worrier wala game khel rahe the or yumi ye sab dekh rahi thi or roj ki Tarah apni dadi ki dukan per bethi Chai pi rahi thi sab kuch normal chal raha tha. Tabhi yumi ki dadi ka phone aata hi ki vo bimar hi to aaj yumi ko hi oski dadi ki dampling ki dukan chlani hogi or aaj yumi ke school ki chhoti hoti hi to yumi Maan jati hi or dukan Khholti hi or dampling bnana chalo ker deti hi . Tabhi yumi ki friend ka call aata hi ki sabhi dosto ne ghumne ka plan bnaya hi camping ke liye ja rhe hi per yumi nhi ja sakti thi kyuki ose dukan Sambhalni thi yumi ki friend Natasha ose btati hi ki oska cursh hhi onke sath ja raha hi per yumi nhi ja sakti thi or yumi ne dadi se vada bhi kiya tha isliye man ko mar ker vo kaam kerne lag jati hi per oske Dimag me aabhi bhi camping or cursh se milne hi chal raha tha pure din kaam kerke yumi thak chuki thi ab shaam ke 8 bje the or yumi ki dadi bhi aa gai thi osne yumi se kha ki ab bo ghar jae aage vo Sambhal legi . Yumi dadi ko aaj ki sari kmai de ker Jane lagti hi . Tabhi barish shuru ho jati hi or yumi chhata Lana bhul jati hi to vo ek dukan ka pass khadi ho jati hi tabhi vo dekhti hi ki ek van tegi se aati hi or kuch Saman fek ker chali jati hi yumi os Saman ko dekhne jati hi to vo ek lash hoti hi jiske chhote chhote tukde ker ke ose suitcase me pack kiya jota hi yumi dekh ker ghabra jati hi or vaha se bhagne lagti hi tabhi osse yaad aata ji ki agar osne police ko nhi btaya to police ose jimedar samjhe gi or yumi ne hj os lash ko sabse pehele dekha tha tabhi vo sochti hi ki os lash ke pass vapas jao or police ko phone kro kyuki oska phone bhi lash ke pass hi rhe gya hi .yumi himat kerke lash ke pass jati hi or apna phone othati hi or police ko call kerne hi Wali hoti hi ki vo van dobara vaha aati dikhti hi yumi ko vo jaldi se chup jati hi . Vo van aati hi jiski number plate nhi hoti hi ot osme se ek bohot bada aadmi niklta hi jisne apne muh per mask pehen rkha tha .
Navyug ka Yoddha by SourabhPal768
12 parts Ongoing
यह कहानी रूबी नाम की एक सामान्य लड़की से शुरू होती है, लेकिन जैसे-जैसे रहस्य खुलते हैं, उसके जीवन में शक्तिशाली मिशन, रहस्यमयी दुश्मन और छुपे हुए राज सामने आते हैं। रूबी की असाधारण बुद्धि और शक्तियों के पीछे उसके परिवार, उसकी बहन और उसकी जड़ें जुड़ी हैं। कहानी में आपको रहस्यमयी मूर्तियाँ, खतरनाक मिशन और भावनाओं का संगम देखने को मिलेगा। क्या रूबी अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल कर दुनिया को बुराई से बचा पाएगी? क्या उसे अपनी असली पहचान और परिवार की सच्चाई का पता चलेगा? इस बुक में रोमांच, सस्पेंस, भावनात्मक जटिलताएँ और अद्भुत ट्विस्ट्स हैं, जो आपको हर पन्ने पर बांधे रखेंगे। अगर आप रहस्य, शक्ति और भावनाओं की दुनिया में खो जाना चाहते हैं, तो यह बुक आपके लिए है!
प्रेम मार्ग सिद्धांत: आत्म-दर्शन, विश्व शांति की ओर by Gopal4
7 parts Ongoing
"प्रेम मार्ग सिद्धांत: आत्म-दर्शन, विश्व शांति की ओर" एक गहन और प्रेरणादायक पुस्तक है जो प्रेम के सार्वभौमिक सिद्धांत को आत्म-ज्ञान और विश्व शांति प्राप्त करने के लिए एक मूलभूत मार्ग के रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक पाठकों को एक ऐसी यात्रा पर ले जाती है जहाँ वे आंतरिक शांति और सद्भाव के माध्यम से बाहरी दुनिया में प्रेम और समझ का विस्तार करना सीखते हैं। यह कृति इस विचार पर केंद्रित है कि सच्ची शांति की शुरुआत व्यक्ति के अपने भीतर से होती है। जब हम आत्म-दर्शन के माध्यम से अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानते हैं और उसमें प्रेम को स्थापित करते हैं, तो हम दूसरों के साथ अपने संबंधों में भी प्रेम, करुणा और सहिष्णुता का विस्तार करते हैं। यह व्यक्तिगत परिवर्तन ही अंततः परिवार, समुदाय और फिर पूरे विश्व में शांति और सामंजस्य स्थापित करने की नींव रखता है। पुस्तक में प्र
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