14 partes Continúa चलो, आज फिर से अंतर्मन की गहराइयों को छुआ जाए।उस महबूबा की आँखों में उतर जाया जाए।उसके जुल्फों की छाँव में सर रखकर, कुछ गुनगुनाया जाए। उसकी होठों की तरप को आजमाया जाए।
अगर किसी जमीन में नमी ना हो ,तो वहाँ दिवानों के लहू की नदी बहाई जाए ।अगर कहीं चाँदनी इठलाने लगे ,तो उसको अपनी माशूका की खूबसूरती दिखाई जाए।