RakeshTyagi

दोस्तों मेरी पुस्तक " मेरी कलम से " को जो प्यार , दुलार और समर्थन आप सबसे मिल रहा है उसे देखकर मैं गदगद् हूँ और शुक्रगुज़ार हूँ तहे-दिल से आप सबका कि आपने मुझे इतनी इज़्ज़त बख़्शी और अपना कीमती समय दिया ।
          	           दोस्तों अब आप सबकी प्यारी इस पुस्तक की यात्रा अपनी मंज़िल यानि सम्पूर्णता की ओर बढ़ रही है । अगले चन्द रोज़ में यह पुस्तक पूरी हो जाएगी । मैंने कोशिश की है कि अपनी बेहतरीन रचनाओं  से आपको रू-ब-रू कराऊँ । मेरी आपसे गुज़ारिश है जिस प्रकार आपने अब तक पेश की गई रचनाओं को अपना प्यार और समर्थन दिया है अपनी likes और comments करके ये सिलसिला आगे भी बनाये रक्खेंगे । एक बात और....
          	                    जिन दोस्तों ने अभी तक ये पुस्तक नहीं पढ़ी है एक बार अवश्य पढ़ें और अपनी बेशक़ीमती  टिप्पणियों से अवगत कराऐं । शेष फिर...
          	                               आपका अपना
          	                              राकेश ' नादान '

avijit3001

Thank u that u voted and liked Parashuram Chap 1. U r a great poet. Please go through the next chapters and say what do u feel, good or bad, i.e. I expect a proper criticism. I stay in Kolkata. I was good in Hindi but now lost touch a bit. These days I find a bit difficult to read Hindi.  But I will manage. Once I marveled my superiors by reading Hindi newspapers. So how can I forget? :)

RakeshTyagi

दोस्तों मेरी पुस्तक " मेरी कलम से " को जो प्यार , दुलार और समर्थन आप सबसे मिल रहा है उसे देखकर मैं गदगद् हूँ और शुक्रगुज़ार हूँ तहे-दिल से आप सबका कि आपने मुझे इतनी इज़्ज़त बख़्शी और अपना कीमती समय दिया ।
                     दोस्तों अब आप सबकी प्यारी इस पुस्तक की यात्रा अपनी मंज़िल यानि सम्पूर्णता की ओर बढ़ रही है । अगले चन्द रोज़ में यह पुस्तक पूरी हो जाएगी । मैंने कोशिश की है कि अपनी बेहतरीन रचनाओं  से आपको रू-ब-रू कराऊँ । मेरी आपसे गुज़ारिश है जिस प्रकार आपने अब तक पेश की गई रचनाओं को अपना प्यार और समर्थन दिया है अपनी likes और comments करके ये सिलसिला आगे भी बनाये रक्खेंगे । एक बात और....
                              जिन दोस्तों ने अभी तक ये पुस्तक नहीं पढ़ी है एक बार अवश्य पढ़ें और अपनी बेशक़ीमती  टिप्पणियों से अवगत कराऐं । शेष फिर...
                                         आपका अपना
                                        राकेश ' नादान '

KanchanMehta

Hello Sir, Thank you for the follow and voting for my poem 'Anokha Bazaar'
          Ummeed h aapko ye kvita pasnd aai hogi?
          
          agr aap or kvitaae padna chahe to meri profile check kr skte h aapko or bhi achhi kavitaae milengi vha :)
          
          Aap apne vichar bhi comments k dwara share kr skte h, mujhe bhut khushi hogi aapk vichar jankr :)