Sak_anya
अगर लिख सकती, तो लिखती
कैसे टूटते तारे
ख़ुशी नहीं,
ग़म बयाँ करते हैं।
अस्तित्व के मिट जाने का,
इस जहान से खो जाने का—
जहाँ उन्होंने
सदियों की कल्पनाओं में
ढेरों सपने सजाए थे।
ग़म होता होगा उन्हें
बिखरे सपनों का,
अधूरी इच्छाओं का,
एक अंतिम मिलन का।
इसलिए,
अगर लिख पाती,
तो लिखती—
ओ टूटते तारों,
आशा है
तुमने ख़ुद को भरपूर जिया होगा,
ख़ुशी से परिपूर्ण,
और मलाल तनिक न होगा।
क्योंकि अधूरा कुछ भी
समय के साथ
खोखला कर देता है—
इरादों को,
नेकी को,
विश्वास को,
पर सबसे पहले
ख़ुद आपको।
~ Navikew❤️