mohabbatehaseen

          	इन आँखों से लिखी मैंने तेरी जुदाई,
          	के छोड़ दी खुशियाँ, छोड़ दी खुदाई।
          	इन हाथों से पिरोए मैंने तेरे ख़्वाब,
          	लिख दी मोहब्बत, जो रही उम्रभर बेहिसाब l
          	

mohabbatehaseen

          इन आँखों से लिखी मैंने तेरी जुदाई,
          के छोड़ दी खुशियाँ, छोड़ दी खुदाई।
          इन हाथों से पिरोए मैंने तेरे ख़्वाब,
          लिख दी मोहब्बत, जो रही उम्रभर बेहिसाब l
          

mohabbatehaseen

ख़ुदा चाहता तो उसे मेरी चाहत बनाता,
          ख़ुदा चाहता तो उसे मेरी इबादत बनाता।
          उसे बस एक ख़्वाब कहकर छोड़ दिया मैंने,
          ख़ुदा चाहता तो उसे मेरी हक़ीक़त बनाता।