Khaamoshiyan

यह कहानी हिम्मत दिखाने के लिए नहीं लिखी गई।
          	यह उस खामोशी की आवाज़ है
          	जो बहुत छोटी उम्र में बड़ी हो गई।
          	जहाँ रोना मना था,
          	वहाँ मुस्कान सीखी गई।
          	और जहाँ सवाल थे,
          	वहाँ चुप रहना आदत बन गई।
          	अगर तुमने भी कभी
          	अपने अंदर चलती लड़ाई
          	किसी को नहीं बताई—
          	तो शायद ये पन्ने
          	तुम्हें समझ पाएँ।
          	

Khaamoshiyan

यह कहानी हिम्मत दिखाने के लिए नहीं लिखी गई।
          यह उस खामोशी की आवाज़ है
          जो बहुत छोटी उम्र में बड़ी हो गई।
          जहाँ रोना मना था,
          वहाँ मुस्कान सीखी गई।
          और जहाँ सवाल थे,
          वहाँ चुप रहना आदत बन गई।
          अगर तुमने भी कभी
          अपने अंदर चलती लड़ाई
          किसी को नहीं बताई—
          तो शायद ये पन्ने
          तुम्हें समझ पाएँ।