shaapit

Chand mera dil , chandini ho tum 
          	Chaand se khafa , chandini kahan

-Itszara

Shayri sunao fir @bio

shaapit

@-Itszara 
            तू इधर-उधर की न बात कर,
            ये बता कि काफ़िला क्यों लुटा?
            मुझे रहज़नों से गिला नहीं,
            तेरी रहबरी का सवाल है।
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shaapit

Chand mera dil , chandini ho tum 
          Chaand se khafa , chandini kahan

shaapit

हाथों की लकीरों में उसका नाम था शायद
          मैं कुछ पल ही सही, उसके साथ था शायद
          लकीरें मिट गईं, उसका हाथ थामे हुए
          सोचता हूँ कभी कभी वो कोई ख़्वाब था शायद
          
          
          - Shaapit

shaapit

इतनी गहराई से लिखूंगा अपने पन्नों में तुम्हें , 
          की पढ़ने वाले को तलब हो जाएगी तुम्हें देखने की।।

shaapit

तो क्या खामोश यूँ ही डूब जाने का इरादा है?
          मगर कैसे भुलाओगे, कि सूरज के उजालों से तुम्हारा कोई वादा है?
          तो फिर अब देखते क्या हो?
          चलो इन कश्तियों की रस्सियाँ खोलो, समंदर में उतरते हैं।
          कहीं तो रोशनी की भी ज़मीनें होंगी, उन्हें ढूँढने,
          अगर हो सके तो ये अँधेरे का समंदर पार करते हैं,
          और इस कोशिश में जीते हैं तो जीते हैं, मरते हैं तो मरते हैं। 

WhatTheHell-y

@shaapit absolutely captivating ♥️
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