20.08.2018 (Hindi)

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क्या करें अब तो आदत सी हो गई है

कल, आज और कल से कोई फर्क नहीं पड़ता

किस्मत भी जैसे रजाई ओढ़ के सो गई है 😒

Poems by Wizard's Apprentice (Book 4)Stories to obsess over. Discover now