#शायरी

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चलो आज मैं सर उठा कर देखूं,
देखता हूँ कितने सर झुकाते हैं,
अक्सर उनकी कोई हैसियत नही होती,
जो दूसरों को औकात दिखाते हैं...
   
                     -अंकित सिंह हर्ष

एक दास्ताँ इश्क़जहाँ कहानियाँ रहती हैं। अभी खोजें