उसे अब उस मोड़ पर नहीं जाना चाहिए,
देर रात तक बैठी रहती है वह ,
सुबह की पहली किरण से ही,
लोग तो अब पागल भी कहने लगे हैं,
कहते हैं किसी प्रेत का साया है उसपर,
अपने रिश्तेदार से मिलने आता है,
एक ने तो जिन का नाम भी लेे लिया,
मैंने जोड़ की डांट लगाई...फिर जाके चुप हुआ,
वह किसी की परवाह नहीं करती,
लोगों ने नशिहत देना बंद कर दिया,
घरवालों में मां आती है दिन में ,
हाथ में खाना...आंखों में आंसू लिए,
बहुत लाडली थी वह..इकलौती थी,
मां सिर पर हाथ फेरकर पीठ सहलाकर चली जाती,
पिताजी ने तो बोलना ही छोड़ दिया था,
वह उनके विरोध जो गई थी,
उनके पसंद का अच्छा रिश्ता ठुकरा दिया था,
सिर्फ इस चाह में की मैं मिल जाऊंगा उसे,
वह मुझसे बेइंतहां मोहब्बत जो करती थी,
मैं भी करता था..शादी करने वाले थे हम,
मैं अपने पिताजी के विरोध न जा सका,
उनकी डांट से मेरे अक्ल ठिकाने आ गए,
मेरी शादी कहीं और तय कर दी गई,
मैं लाख चाह करभी कुछ न कर सका,
उसका दिल तोड दिया मैंने,
उसे एकदम से पराया कर दिया,
दिल कठोर कर उसे समझाया था,
अब सब खत्म अपने बीच में,
वह भी उसी लड़के से शादी कर ले,
रोने लगी...गिड़गिड़ाने लगी,
वह मेरे बगैर नहीं जी पाएगी,
कल्पना भी नहीं कर सकती मेरे बिना एक पल भी रहने की,
अचानक भीड़ जुटने लगा वहां पर,
वह समझने को तैयार ही नहीं थी,
वह रोए जा रही थी.. बस रोए जा रही थी,
मैं वहीं सड़क पर रोता छोड़ चला आया,
अब भी वह उस सड़क के पास वाले मोड़ पर बैठे रहती है,
इस आस में की मैं आऊंगा उसे वहां से लेे जाने,
पर मैं समाज के उसूल नहीं तोड सकता,
मैं नहीं जा सकता...._अंकित सिंह हर्ष

आप पढ़ रहे हैं
एक दास्ताँ इश्क़
Poesíaप्यार और दिल दोनों एक ही मंजिल के दो राह हैं.... दोनों के बिना इश्क़ मुकम्मल नहीं होता... #1 hindipoem on 1st Oct 2021 #3 india on 3rd Oct 2021 #4 dil mein on 26th march 2020 #4 poem mein on 16thsept 2021