दृश्य 1
रात के 10 बजे थे। गांव गहरे अंधेरे में डूबा हुआ था। चारों तरफ सन्नाटा था, दूर-दूर तक किसी इंसान का नामोनिशान नहीं। जितिन अपने कमरे में चारपाई पर लेटा हुआ था। ठंडी हवा खिड़की से आ रही थी, जिससे उसकी नींद और गहरी हो रही थी। तभी अचानक उसके पिता कमरे में आए और बोले,
"लेटता क्या है चारपाई पर? उठ और खेतों की रखवाली करने जा।"
जितिन को नींद के आगोश में जाना ज्यादा अच्छा लग रहा था, लेकिन पिता का आदेश अनदेखा करना आसान नहीं था। वह धीरे-धीरे उठकर बैठ गया। उसका मन तो कतई नहीं था खेतों में जाने का, लेकिन उसने मजबूरन उठकर मुंह धोया।
पिता ने देखा कि वह तैयार होने लगा है, तो वे अपने कमरे में सोने चले गए। लेकिन जितिन के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। वह थोड़ा शरारती किस्म का लड़का था। उसने अपनी मां को पास बुलाया और धीमी आवाज में मुस्कुराते हुए कहा,
"मां, मुझे आपकी साड़ी पहननी है।"
मां ने गुस्से से उसे घूरा और फुसफुसाकर कहा,
"तुझे होश है? तेरे पिता घर में हैं। उन्होंने तुझे साड़ी में देखा तो तेरी लाश खेतों में मिलेगी।"
जितिन ने हंसते हुए कहा,
"अरे मां, कोई नहीं देखेगा। प्लीज़! बस एक बार।"
मां ने गुस्से में आंखें तरेरीं और कमरे के अंदर चली गईं। थोड़ी देर बाद वह वापस लौटीं, तो उनके हाथ में एक साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट और ब्रा थी। मां ने चुपचाप उसे पकड़ाया और कहा,
"ये ले, लेकिन जल्दी से निकल जा। अगर तेरे पिता ने देख लिया तो मेरी भी खैर नहीं।"
जितिन ने हंसते हुए सब सामान एक थैले में डाला, एक डंडा और टॉर्च उठाई, और घर से बाहर निकल गया। खेतों की ओर जाते हुए उसकी चाल से ही लग रहा था कि आज रात कुछ अलग होने वाला है।
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Feminine
FantasyIt's never too late to learn something new. With the support of a loved one, anything is possible.
