(स्थान: घर)
घर में चारों तरफ शादी की तैयारियों का शोर था। हर कोई अपने-अपने काम में व्यस्त था। अंकिता की शादी को बस कुछ ही दिन बचे थे। माँ रिश्तेदारों की लिस्ट में लगी थीं, पापा कैटरिंग वाले को फोन पर डांट रहे थे।
अंकिता को आज अपनी शादी के लिए कुछ खास ड्रेस लेनी थी, और जितिन घर में खाली बैठा था।
अंकिता ने जितिन से कहा:
अंकिता (हंसते हुए): "चल उठ! तेरे खाली बैठे रहने से शादी नहीं हो जाएगी। चल मेरे साथ मार्केट, तेरे भाई को कुछ काम तो करने दे।"
जितिन (टालने की कोशिश करते हुए): "अरे बहन, तूने भाई को फ्री ड्राइवर समझ रखा है क्या?"
अंकिता (आंखें घुमाते हुए): "चुपचाप चल, नहीं तो मम्मी को बोल दूंगी कि तूने शादी का कार्ड अभी तक बांटे ही नहीं!"
जितिन बेमन से तैयार हो गया और दोनों बाजार की तरफ निकल पड़े।
(स्थान: साड़ी की दुकान)
दुकान में कदम रखते ही अंकिता ने चारों तरफ रंग-बिरंगी साड़ियों का मुआयना करना शुरू कर दिया। जितिन एक कोने में बैठकर मोबाइल में स्क्रॉल कर रहा था। तभी अंकिता ने एक बादामी रंग की साड़ी हाथ में ली और जितिन की ओर बढ़ते हुए शरारती लहजे में बोली:
अंकिता (मुस्कुराते हुए): "जितिन, ये साड़ी तू ट्राई कर ले, तेरे ऊपर बहुत जचेगी!"
जितिन चौंक गया और थोड़ा शर्माते हुए बोला:
जितिन (हंसते हुए): "क्या बहन, कुछ भी बोलती है। लड़कियों के कपड़े मुझ पर!"
अंकिता (आंखें तरेरते हुए): "अरे चुप कर, बस एक बार ट्राई कर ले। मजा आएगा।"
अंकिता ने जितिन के कंधे पर साड़ी का एक पल्लू डाल दिया। तभी दुकानदार भी मजे लेने के मूड में आ गया। उसने साड़ी का दूसरा सिरा पकड़कर जितिन की कमर के चारों ओर लपेट दिया और बोला:
दुकानदार (शरारती लहजे में): "मैडम बिल्कुल सही कह रही हैं। ये साड़ी वाकई आप पर बहुत अच्छी लगेगी।"
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Feminine
FantastikIt's never too late to learn something new. With the support of a loved one, anything is possible.
