रात के सात बज रहे थे। जितिन नहाकर बाथरूम से बाहर निकला, तौलिया लपेटे हुए, जिसके नीचे उसकी वैक्स की हुई टाँगें चमक रही थीं। कमरे की हल्की रोशनी में उसका चेहरा थोड़ा गंभीर, थोड़ा उत्साहित था। वो सीधा वॉर्डरोब की ओर बढ़ा, जहाँ उसने एक सेकंड के लिए दरवाजा खोला और उसकी नजर पड़ी एक गुलाबी रंग के ब्रा-पैंटी सेट पर। उसने उसे बाहर निकाला, हल्के से छुआ, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
पैंटी को पहले हाथ में लिया, उसका सॉफ्ट सिल्की फैब्रिक उसकी उंगलियों से फिसल रहा था। जैसे ही उसने पैंटी को अपनी वैक्स की हुई टाँगों पर चढ़ाना शुरू किया, एक अजीब सी सिहरन उसके शरीर में दौड़ गई। पैंटी धीरे-धीरे ऊपर सरक रही थी, उसकी चिकनी टाँगों को चूमती हुई, और जितिन के अंदर कुछ जागने लगा। वो मर्दवाला जितिन, जो दिनभर ऑफिस में फाइलें उलटता-पलटता था, अब धीरे-धीरे एक औरत के रूप में ट्रांसफॉर्म होने लगा था। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, जैसे कोई सीक्रेट बाहर आने को बेताब हो।
फिर उसने ब्रा उठाई। गुलाबी स्ट्रैप्स को उसने अपने कंधों पर चढ़ाया, और पीछे हाथ ले जाकर हल्के से हुक लगाया। *क्लिक*—हुक बंद होते ही उसने एक गहरी सांस ली। ब्रा ने उसके सीने को एक नया शेप दिया, और उस पल में जितिन के अंदर की औरत पूरी तरह जाग चुकी थी। वो अब सिर्फ जितिन नहीं था—वो कुछ और बन रहा था, कुछ ऐसा जो उसे आजादी दे रहा था, एक नई पहचान।
वो बाथरूम के शीशे के सामने गया, अपने गीले बालों को तौलिये से पोंछते हुए। उसने एक बार खुद को देखा, फिर जोर से आवाज़ लगाई, "श्वेता! ओये श्वेता, सुन ना! आज क्या पहनूँ, बता ना यार!" उसकी आवाज़ में एक मस्ती थी, जैसे वो इस पल को जी रहा हो।
किचन से श्वेता की हँसी गूँजी। वो कढ़ाई में कुछ तड़का लगा रही थी, और हँसते हुए बोली, "अरे, तू तो बिल्कुल *item* बन रहा है! क्लब जाना है ना, तो कुछ सेक्सी सा पहन ले, भाई! कोई साड़ी-वाड़ी मत पहन देना, सती-सावित्री बनके! हाहा, *bitch* तू तो रेडी होने में भी टाइम लेता है, जल्दी कर!"
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Feminine
FantasíaIt's never too late to learn something new. With the support of a loved one, anything is possible.
